मप्र में दिव्यांगों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला
भोपाल। मध्य प्रदेश में निशक्तजनों ने मप्र डिसेबिलिटी नेटवर्क के बैनर तले सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इनका आरोप है कि भारत सरकार और म.प्र सरकार दिव्यांग कहकर शब्दजाल में उलझाकर व इस शब्द की मार्केटिंग कर यह जता रही है की वह बहुत कुछ कर रही है लेकिन धरातल पर कुछ नहीं है I हम लोगो ने दिनांक 22 जून से 26 जून 2016 तक विदिशा से भोपाल तक 70 कि. मी कड़ी धुप और भरी बरसात में हाथ पैर को छिलते हुए पदयात्रा की और बड़ी मुश्किल से 5 मिनट की मुख्य मंत्री जी से मुलाकात हुई और वर्तमान केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावडेकर के सामने अपने OSD माथुर  व संचालक सामाजिक न्याय एवं नि:शक्त कल्याण को निर्देश दिए की 21 सदस्य के प्रतिनिधि मंडल से बिन्दुवार विस्तृत चर्चा के निर्णयों से हमें अवगत कराये I इस समूह के बद्री प्रसाद ने बताया कि इस मुलाकात के बाद हमें सबसे पहले आश्वासन दिया गया था की दोनों हाथ से विकलांग धरमदास को टीकमगढ़ कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से रोजगार दिलवाया जायेगा लेकिन कई चक्कर लगाने के बाद अतिथि शिक्षक के पद पर इन्हें नियुक्ति नहीं मिली इनकी माँ की भी 2 दिन पहले सांप के काटने से मौत हो गयी, अब इनका कोई नहीं है  इसके अलावा अनुज गुप्ता और उसकी मूक बधिर पत्नी जो गरीबी के कारण आत्महत्या करने वाली थी को आश्वासन दिया था की सतना कलेक्टर मदद करेंगे लेकिन कोई मदद नहीं हुईI इसी तरह से मुख्य मंत्री जी के साथ विकलांगो का कार्यक्रम या विस्तृत तरीके से भेंट करने का बोला था वह सब हवा हवाई हो गया  I

1.      आईटीआई में एडमिशन और नौकरी: मूक बधिरों के लिए मुख्य मंत्री की घोषणा अनुरूप शत प्रतिशत जो आईटीआई कॉलेज में बैच चालू हो रहे है उनका मूक बधिर व्यक्ति को प्रशिक्षण अधिकारी के पद पर नियुक्ति न देने के कारण बहिष्कार किया गया इस कारण 419 सीट्स पर सिर्फ 28 मूक बधिरों का प्रवेश हुआ  इसी तरह दृष्टि विकलांग प्रशिक्षक नहीं रखने के कारण 108 सीट्स पर मात्र 8 दृष्टि विकलांग छात्रों ने प्रवेश लिया I सरकार के जिद्दी अधिकारी विकलांगो का कल्याण अपने ढंग से करना चाहते है जो की व्यवहारिक नहीं है I इसके अलावा मूक बधिरों ने मांग की थी की मूक बधिरों की भर्ती के बाद यदि आवश्यकता हो तो उनमे पहले आई.टी.आई प्रशिक्षित इंटरप्रेटर की नियुक्ति की जाये चाहे वह A लेवल sign language इंटरप्रेटर ही क्यों न हो I साक्ष्य के तौर पर कौशल विकास विभाग का पत्र सलंग्न है I

2.      पेंशन व बेरोज़गारी भत्ता: विकलांगो को तेलंगाना में 1500 रूपए, गोवा में 3500 पेंशन दी जाती है I इसी तरह हरियाणा में 2000 रूपए बेरोजगारी भत्ता प्रति माह विकलांगो को दिया जाता है I पिछले वर्ष बडवानी में मोतिया बिन्द के ऑपरेशन फ़ैल होने से 56 लोगो की आँखों की रोशनी चली गयी थी तब मुख्य मंत्री जी ने तत्काल सभी को आजीवन 5000 मासिक पेंशन चालू कर दी है इसी तारतम्य में प्रदेश के जन्म से दिव्यांगो  को विकलांग अधिनियम 1995 की धारा 68 के प्रावधान अनुरूप बेरोजगारी भत्ता एवं पेंशन के रूप में पांच हजार रूपए प्रतिमाह तत्काल प्रदान क्या जाये  I जबकि मध्य प्रदेश में मात्र 150 रूपए मासिक पेंशन दी जाती है I

3.      शिक्षा में डी.एड, बी.एड की छुट: संविदा शाला शिक्षको की नियुक्ति में दिव्यांगो (मूक बधिर जिन्हें पहली बार आरक्षण का लाभ मिल रहा है ,दृष्टी विकलांग,अस्थि विकलांग ) हेतु  पात्रता परीक्षा सम्बन्धी शर्त को शासन के द्वारा बेगा सहरिया भारिया अनुसूचित जन जाती के जैसे छुट प्रदान करे व  प्रशिक्षण हेतु गुरूजी को शिक्षक के पद पर जैसे नियुक्ति दी गयी वैसे ही  या पश्चिम बंगाल के जैसे शेक्षणिक योग्यता डी.एड और बी.एड अर्जन हेतु पांच वर्ष के समय की छूट देते हुए सीधी भर्ती की जाये I

4.      बस-पास: जिस प्रकार राजस्थान, उत्तर प्रदेश,दिल्ली में विकलांगो को बस में यात्रा हेतु निशुल्क बस पास दिए जाते है उसी प्रकार मध्य प्रदेश में भी बसों में निशुल्क यात्रा करने की सुविधा दी जाये व बसों एवं बस स्टैंड को सुगम अभियान अंतर्गत विकलांगता को आवागमन को ध्यान में रखते हुए बनाये जाये I इस सम्बन्ध में मध्य प्रदेश के परिवहन आयुक्त ने आदेश तो जारी तो  कर दिए है लेकिन इसका क्रियान्वयन नहीं हो रहा है I

5.      आयुक्त: आयुक्त निशक्तजन के पद पर जिसकी अवधि पांच जून 2016 को समाप्त हो चुकी है अब इस पद पर ऐसे व्यक्ति की तत्काल नियुक्ति की जावे जो विकलांगता के क्षेत्र में पुनर्वास सम्बन्धी कार्य कई वर्षो से करता आ रहा हो , विधि वेत्ता हो,व्यावहारिक धरातल पर सक्रिय रहकर विकलांगो के हित में कार्य कर रहा हो I

6.      कानून में बदलाव: संसद में लाये जा रहे RPWD बिल नए विकलांग कानून में Hearing impaired की जगह Deaf शब्द जोड़ा जाये व Hard of Hearing को 20 वी विकलांगता श्रेणी के रूप में जोड़ा जाये I इसके लिए शिवराज जी केंद्र को पत्र लिखे व इसको सुनश्चित कराये

7.      खेलकूद: खेलकूद विभाग के द्वारा प्रति वर्ष विकलांग कोटे में सिर्फ एक श्रेणी के विकलांग व्यक्ति को विक्रम पुरुस्कार दिया जाता है इसे प्रति वर्ष तीनो श्रेणी के विकलांगो को दिया जावे I साथ ही खेलकूद विभाग के द्वारा सामान्य खिलाडियो को जो सुविधाए व खेल वृति प्रदान की जाती है वह भी सब विकलांग खिलाडियो को दी जाये इसके अलावा रास्ट्रीय एवं अंतररास्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आने जाने का व्यय भी दिया जाये I हरियाणा सरकार स्पोर्ट्स में इंटरनेशनल लेवल पर गोल्ड जीतने पर पांच करोड़ ,सिल्वर पर तीन करोड़ और कांस्य पर दो करोड़ दिव्यांगो को देती है I वही ब्लाइंड क्रिकेट में उड़ीसा व कर्णाटक 10-10 लाख इनाम देती है वही म.प्र सरकार एक रूपए  का प्रशंसा पत्र भी नहीं देती I मध्य प्रदेश के गौरव सोनू गोलकर (ब्लाइंड एशिया कप भारतीय खिलाडी ), अब्दुल समद(मूक बधिर ) राष्टीय हॉकी खिलाडी का ओलम्पिक में चयन इसलिए नहीं क्या गया क्यों की वह मूक बधिर हैं I यह मध्य प्रदेश के गोल कीपर है व इनके प्रशंसक पूर्व भारतीय टीम के कप्तान धनराज पिल्लई व अशोक ध्यानचंद है ने इनके रोजगार के लिए मध्य प्रदेश सरकार को चिट्ठी लिखी लेकिन कुछ नहीं हुआ I मुख्य मंत्री जी ने इनको इनके शानदार प्रदर्शन के कारण अवार्ड तो दिया किन्तु नौकरी नहीं दी I

8.      स्कूल शिक्षा विभाग: स्कूल शिक्षा विभाग में विकलांग प्रकोष्ठ का गठन मुख्य मंत्री की घोषणा 29 अप्रैल 2008 विकलांग पंचायत अनुसार वास्तव में हो व पिछले पांच वर्ष से IEDSS योजना अंतर्गत अनुदान न प्राप्त न होने से स्वयं सेवी संस्था के शिक्षको को वेतन नहीं मिला है वह प्रदान होवे I

9.      सरल स्थानातरण नीति: मध्य प्रदेश शासन के अंतर्गत नि:शक्त कर्मचारियो के लिए सरल स्थानातरण नीति बनाई जाये व अनाप्पति प्रमाण पत्र से इन्हें छुट दी जाये व उन्हें गृह स्थान पर पदस्थ किया जाये I

10.  मेडिकल बोर्ड में सुधार : स्वस्थ्य विभाग के अंतर्गत संचालित जिला स्त��

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