दलित बच्चों की मौत के बाद कांग्रेस ने मप्र के मुख्यमंत्री से मांगा इस्तीफा भोपाल। मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विधानसभा क्षेत्र में हुई हर घटना को कांग्रेस मुद्दा बनाने से चूकती नहीं है। 18 जुलाई 2016 को बुधनी के तालपुरा गांव में दलित दुर्गाबाई द्वारा अपने 8 माह के पुत्र के दिल में छेद होने और उसका उपचार नहीं होने के कारण अपने पुत्र सहित केरोसिन डालकर जान देने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। घटना की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अरूण यादव ने पीडि़त परिवार की मुखिया से फोन पर चर्चा की। उनके निर्देश पर घटना स्थल पर प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री पी.सी. शर्मा, मुख्य प्रवक्ता के.के. मिश्रा और प्रवक्ता विभा पटेल ने यादव को सौंपी अपनी संयुक्त रिपोर्ट में कई चौकाने वाले तथ्य उजागर किये हैं, जो राज्य सरकार और प्रशासनिक तंत्र की गंभीर लापरवाही को उजागर कर रहे हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस गरीब दलित परिवार को अपने दो सदस्यों की मौत के दूसरे दिन मंगलवार को भी प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही का शिकार होना पड़ा। उनकी हुई अंत्येष्टि के पूर्व पोस्टमार्टम स्थानीय अस्पताल में इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि वहां डाक्टर मौजूद नहीं थे, इस कारण पोस्टमार्टम होशंगाबाद ले लाकर करवाया गया। रिपोर्ट में इस बात पर भी घोर आश्चर्य किया गया है कि जब प्रदेश में बच्चों के दिल के आपरेशन के लिए संचालित ‘‘अटल बाल उपचार योजना’’ कार्यरत है और ‘‘मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान योजना’’ को लेकर प्रति वर्ष 25 करोड़ रूपयों की राशि का आवंटन निर्धारित है, तब मुख्यमंत्री के निर्वाचित क्षेत्र में ही इस मृत गरीब दलित बच्चे का उपचार क्यों और किसलिए नहीं हो सका? तमाम अधिकारियों और डॉक्टरों से की गई गुहार क्यों नहीं सुनी गई? मृतकों के शोकाकुल परिजनों को सांत्वना और सहयोग देने कोई भी प्रशासनिक अधिकारी क्यों नहीं पहुंचा?

कांग्रेस नेताओं की इस संयुक्त रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया गया है कि मृतकों के परिजनों को सच्चाई नहीं बताने के लिए प्रशासन द्वारा दबाव बनाया जा रहा है कि यदि सच्चाई उजागर की गई तो दहेज प्रताड़ना के झूठे मामले में प्रकरण दर्ज कर दिया जाएगा। कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से उक्त यक्ष प्रश्नों का खुलासा किये जाने का आग्रह करते हुए यह भी कहा है कि उनके ही निर्वाचन क्षेत्र में सरकार की तमाम योजनाएं और ‘‘ईलाज के अभाव में किसी को मरने नहीं दूंगा’’ जैसे कथन ध्वस्त क्यों, कैसे और किसलिए हुए? लिहाजा उन्हें ऐसा झूठ परोसने के लिए अपने पद से तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।

LEAVE A REPLY