छींद धाम जहां से कट जाते हैं सारे दुख

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यह कलयुग और इसमें भगवान के साक्षात दर्शन करना है तो छींद गांव में बने हनुमान मंदिर जाइए। जहां प्रतिदिन हजारों लोग मुरादें लेकर आते हैं और झोली भरकर जाते हैं।

श्वेत न्यूज संवाददाता. भोपाल

राम भक्त संकटDSC_0282 मोचन हनुमान जी यह मंदिर साक्षात चमत्कार का एक अलौकिक स्थान बन गया है। आज इसकी प्रसिद्धी ही है कि लोग न केवल आसपास से बल्कि दूर राज्यों से भी आते हैं। देश के हृदय स्थल मप्र और इस प्रदेश की राजधानी भोपाल से जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बरेली तहसील मुख्यालय से बमुश्किल छह किमी की दूरी पर स्थित है छींद धाम पतित पावन स्थल। जिसके बारे में उल्लेख करना आसान नहीं है। यह स्थान अनेक चमत्कारिक घटनाओं से भरा पड़ा है। यही वजह है कि भोपाल व मप्र के साथ दूर स्थलों से भी दद्दा जी की चमत्कारिक प्रतिमा की एक झलक पाने बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते है। श्वेत न्यूज ने मौके पर जाकर इस मंदिर का इतिहास जाना तो पता चला कि छींद गांव में रघुवंशी समाज का बाहुल्य है। चूंकि यह मंदिर भगवान श्री राम के दास पवनपुत्र हनुमान का है और रघुवंश समाज भगवान रात के वंशज कहलाते हैं। एक कथा यह भी है कि छींद गांव में वर्षों पुराना एक पीपल का पेड़ है, जिसके नीचे हनुमान जी की प्रतिमा विराजमान है। ऐसा कहा जाता है कि स्वयं भगवान हनुमान ने उनके एक उपासक को दर्शन देकर कहा कि उनकी मूर्ति पीपल के पेड़ के नीचे हैं और इसे बाहर निकालकर स्थापित करें। आज्ञानुसार उपासक ने ऐसा ही किया और आज उसी वृक्ष के नीचे एक विशाल मंदिर स्थापित है। आज से करीब पंद्रह वर्ष पहले तक यहां सामान्य कुटिया थी और उसी के नीचे हनुमान जी विराजमान थे। लेकिन लोग धीरे-धीरे आने लगे और उनकी मुश्किल दूर होने लगी DSCN8346तो यहां दूर-दूर से लोगों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। आज यहां विशाल मंदिर बना हुआ है और मंगलवार की सुबह तीन बजे से भक्तों की कतार दर्शन के लिए लग जाती है। चार से पांच बजे के बीच होने वाली आरती में हजारों भक्त शामिल होते हैं। माना जाता है कि सुबह की आरती के दर्शन से हर मुश्किल आसान हो जाती है। किसी भी मंगलवार सुबह से लेकर शाम तक 5 से 10 हजार भक्त यहां दर्शन के लिए आना आम बात है। मंदिर संचालन के लिए बनाए गए ट्रस्ट के अध्यक्ष कृष्ण कुमार रघुवंशी है, जो पूरे समय मौजूद रहते हैं।

एक दिन में होते हैं 20 भंडारे

DSC_0335आज परिस्थिति यह है कि प्रति मंगलवार कई भंडारे उन भक्तों द्वारा कराए जाते हैं, जिनके कार्य यहां से पूर्ण हो गए हैं।  कई बार तो एक ही दिन में 15 से 20 भंडारों का आयोजन होता है। चमत्कार यह है कि सभी भंडारे सांध्यकाल तक चलते हैं और भोजन करने वालों की कतार पूरे दिन लगी रहती है। वहीं भंडारे में सारी व्यवस्थाएं स्वयं चलने लगती हैं।

 

क्या आम आदमी और क्या मुख्यमंत्री

मंदिर का चमत्का20130423_074400र ऐसा है कि हर वीआईपी यहां मत्था टेकने यहां आता है। फिर चाहे वह मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हो या फिर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती। भक्तों में सांसद, विधायक के साथ आईएएस अफसर व आईपीएस के नाम भी शुमार हैं। कोई भी कलेक्टर जब रायसेन जिले में आमद देता है तो वह छींद स्थित इस हनुमान मंदिर में मत्था टेकना नहीं भूलता। फिर चाहे उसका धर्म कुछ भी हो।

 

बन रहे हैं विश्राम गृह और धर्मशाला

इस मंदिर में भक्तों की बढ़ती संख्या को देखकर प्रशासन ने एक विश्राम गृह बनाने का काम शुरू कर दिया है। लेकिन निजी धर्मशालाओं की यहां खासी कमी है। हाल ही में जब इस मंदर के पास काम शुरू हुआ तो कानूनी दांव-पेंच में उलझकर रुक गया। लेकिन खबर लिखे जाने तक सूचना मिली की काम दोबारा शुरू हो गया। यहां के क्षेत्रीय विधायक रामकिशन पटेल ने निरीक्षण करके समस्याओं को जाना और फिर काम शुरू करवाया। हालांकि यहां महिलाओं के लिए शौचालय बनाने की मांग लम्बे समय से उठ रही है। वहीं इसी जिले से मंत्री रामपाल सिंह राजपूत, गौरीशंकर शेजवार औश्र सुरेंद्र पटवा भी इसमें काफी रुचि ले रहे हैं।

ऐसे पहुंच सकते हैं यहां

छींद मंदिर पहुंचने के लिए भोपाल से तीन रास्ते हैं। पहला रास्ता मंडीदीप, औबेदुल्लागंज, गौहरगंज होते जबलपुर रोड लगता है। दूसरा रास्ता भी भोपाल से चिकलोद जंगल क्षेत्र होते हुए जबलपुर रोड लग जाता है। जबकि तीसरा रास्ता रायसेन मुख्यालय होकर सागर रोड और फिर वहां से उदयपुरा होते हुए जबलपुर रोड से जुड़ता है। तीनों ही तरफ से बरेली के पास पहुंचेंगे और फिर यहीं से दो किमी अंदर जाने के बाद मंदिर पहुंच पाएंगे।

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